A website byAmit Prakash Mehta Groups
☕ Chai Ki Gumti · Chai, Gaane & Yaadein
← गुमटी की डायरी

हिंदी · Read in English

रोशनी के बाद की शाम

पंडाल से लौटकर एक कप चाय.

कभी घूमने का सबसे शांत हिस्सा घर लौटने के बाद शुरू होता है.

रौशनी से गली तक

पंडालों की रौशनी और आवाज़ों से निकलते ही अपनी गली कुछ अलग लग सकती है. थोड़ी देर पहले हर ओर चहल-पहल थी; अब कदमों की आहट साफ़ सुनाई देती है. उत्सव ख़त्म नहीं हुआ है. बस उसका रंग भीड़ से निकलकर मन में ठहर रहा है.

चाय के साथ ठहरना

घर पहुँचकर एक कप चाय बनाइए और आज की सैर से कोई एक छोटा दृश्य चुनिए. शायद रोशनी का कोई रंग, रास्ते का मोड़ या साथ चलते किसी अपने की मुस्कान. हर बात की तस्वीर लेना ज़रूरी नहीं. कुछ पल याद में वैसे ही अच्छे लगते हैं, जैसे गर्म कप को दोनों हाथों में थामना.

एक गीत, अपनी याद

जब शोर पीछे रह जाए, कोई जाना-पहचाना गीत उस शाम को धीरे से पूरा कर सकता है. “Pyar Diwana Hota Hai” आज की सुनने की पसंद है; इसे पंडाल की परंपरा बताने की जगह अपनी चाय के समय का साथी समझिए. आपकी शाम का गीत कोई और भी हो सकता है.