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☕ Chai Ki Gumti · Chai, Gaane & Yaadein
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इंतज़ार की छोटी खुशी

छुट्टी से पहले आख़िरी घंटी.

कभी छुट्टी की शुरुआत कैलेंडर से नहीं, एक आवाज़ से होती थी.

घड़ी की तरफ़ आख़िरी नज़र

स्कूल के दिन की आख़िरी कुछ मिनटों में पढ़ाई से ज़्यादा ध्यान दरवाज़े और घड़ी पर टिक सकता था. कॉपी बंद होने से पहले ही घर की राह मन में बन जाती. घंटी बजती तो कोई बड़ी घोषणा नहीं होती, फिर भी उस एक आवाज़ में अगले दिनों की खुली जगह सुनाई देती थी.

रास्ता भी छुट्टी का हिस्सा

बाहर निकलकर घर पहुँचने की जल्दी होती, पर रास्ते में हल्कापन अलग होता था. बैग वही रहता; उसका वज़न शायद नहीं बदलता. बदलती थी यह सोच कि अब कुछ सुबहें अपनी मर्ज़ी से शुरू होंगी. कभी कोई धुन उस इंतज़ार की तरह लगती है—अभी कुछ हुआ नहीं, लेकिन अच्छे वक़्त का आभास हो रहा है.

आज की छोटी महफ़िल

एक ऐसा गीत चुनिए जो आपको किसी पुराने इंतज़ार की याद दिलाए. उसे सुनते हुए उस समय की कोई एक छोटी बात याद कीजिए: रास्ता, मौसम या घर पहुँचकर पहली चाय. याद साफ़ न आए तो भी ठीक है. कभी सिर्फ़ इंतज़ार की वह हल्की-सी खुशी साथ रह जाती है.