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☕ Chai Ki Gumti · Chai, Gaane & Yaadein
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अँधेरे की छोटी महफ़िल

बिजली जाने पर छत की अंताक्षरी.

जब बत्ती बुझती थी, कई घरों में बातचीत की आवाज़ थोड़ी तेज़ हो जाती थी.

पंखा रुका, बात शुरू हुई

बिजली जाते ही कमरे में एक अलग-सी ख़ामोशी उतरती थी. फिर कोई खिड़की खोलता, कोई मोमबत्ती ढूँढ़ता और कोई पूछता कि छत पर चलें? गर्मी कम न भी हो, साथ बैठने से इंतज़ार छोटा लग सकता था.

एक अक्षर, कई यादें

अंताक्षरी के लिए गाने की किताब नहीं चाहिए थी. बस पिछली धुन का आख़िरी अक्षर और अगली धुन याद करने की कोशिश. कोई सुर भूल जाता, कोई फ़िल्म का नाम ग़लत बोल देता, और सब मिलकर हँस पड़ते. उस खेल में जीत से ज़्यादा मज़ा किसी भूले हुए गीत को फिर से पहचानने में था.

आज की सुनने की रस्म

आज रोशनी जल रही हो तब भी एक शाम फोन की स्क्रीन थोड़ी देर के लिए अलग रखिए. “Mere Pyar Ki Umar Ho Itnee Sanam” सुनिए और किसी अपने से पूछिए: तुम्हें किस गीत का पहला सुर अब भी याद है? जवाब मिले या न मिले, बातचीत शुरू हो सकती है.