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☕ Chai Ki Gumti · Chai, Gaane & Yaadein
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दोपहर का एक सुकून

रविवार की दोपहर, एक पुराना गीत.

जब दिन की जल्दी थोड़ी देर के लिए रुक जाती है.

दोपहर की अपनी आवाज़

रविवार की दोपहर का एक अलग सुर होता है. बाहर की रोशनी तेज़ होती है, पर कमरे में पंखे की धीमी आवाज़ और अधूरी चाय के बीच समय कुछ नरम लग सकता है. ऐसे वक़्त में पुराने गीत को सिर्फ़ पीछे बजने देने के बजाय, उसके लिए थोड़ी जगह बनाइए. फोन को मेज़ पर उलटा रखिए और पहली धुन से आख़िरी सुर तक वहीं रहिए.

याद को पकड़ना ज़रूरी नहीं

कभी कोई गीत बचपन की छुट्टी याद दिलाता है; कभी बस इतना लगता है कि वह पहले भी कहीं सुना था. याद का साफ़ चेहरा न भी मिले तो कोई बात नहीं. हर पुराना गीत किसी बड़ी कहानी का दरवाज़ा नहीं होता. कुछ गीत केवल इस पल को थोड़ा शांत कर देते हैं.

एक छोटा-सा रविवार

गीत ख़त्म हो जाए तो तुरंत अगला न चुनें. चाय का एक घूँट लें. फिर सोचें कि किस हिस्से पर आपका ध्यान ठहरा था: आवाज़ पर, वाद्यों पर, या अपने आसपास की ख़ामोशी पर? इस छोटे विराम में सुनना एक काम की तरह नहीं, अपने लिए रखे समय की तरह महसूस हो सकता है.