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सफ़र की छोटी निशानी

पुरानी किताब में मिली टिकट.

कभी एक छोटा काग़ज़ पूरे रास्ते को वापस ले आता है.

पन्नों के बीच

किताब खोलते हुए कभी कोई पुरानी टिकट मिल जाए तो सबसे पहले तारीख़ दिखती है. फिर उस दिन का रास्ता याद आ सकता है—कहाँ से निकले थे, रास्ते में क्या देखा था, पहुँचकर किससे बात की थी. टिकट अपने आप कहानी नहीं बताती; वह बस याद के लिए एक दरवाज़ा खोलती है.

जो काग़ज़ में नहीं लिखा

उस छोटे काग़ज़ पर मौसम, खिड़की की रोशनी या मन की हालत दर्ज नहीं होती. शायद इसलिए उसे देखकर हर व्यक्ति अलग बात याद करता है. और अगर कुछ साफ़ याद न आए, तब भी उस सफ़र का होना कम नहीं हो जाता.

आज का सुनने का पल

“Kasto Mazza” सुनते हुए कोई पुराना रास्ता याद कीजिए. टिकट बची हो या न हो, एक जगह से दूसरी जगह जाने का एहसास अक्सर साथ रहता है. गीत ख़त्म हो तो चाहें उस याद को किसी अपने से बाँटिए, या चाय के साथ अपने पास रखिए.