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भूगोल की कॉपी का सफ़र
काग़ज़ के नक़्शे पर दूर का शहर.
कभी बिना घर से निकले भी किसी जगह की ओर पहला कदम बढ़ जाता था.
उँगली के नीचे रास्ता
भूगोल की किताब में छपा नक़्शा केवल परीक्षा का पाठ नहीं था. उस पर शहर का नाम ढूँढ़ते हुए उँगली नदी, पहाड़ और कई छोटे बिंदुओं से गुज़रती थी. उन जगहों के बारे में कुछ मालूम न हो, तब भी नाम अपने ढंग से मन में रह जाते थे. काग़ज़ पर खिंची एक पतली रेखा कभी इतनी दूर तक जाने का न्योता लग सकती थी जितनी दूर यात्रा करने का कोई इरादा भी नहीं था.
नाम के पीछे की जगह
नक़्शे पर हर शहर एक छोटे अक्षर में सिमट जाता है. असली शहर उससे कहीं बड़ा और लोगों की रोज़मर्रा से भरा होता है. दूर के नाम को देखकर अपने मन की कहानी बना लेना आसान है, पर उसे पूरी सच्चाई मान लेना ठीक नहीं. शायद पुरानी किताब की खूबसूरती यही थी कि वह जिज्ञासा जगाती थी और साथ ही यह याद दिलाती थी कि अभी बहुत कुछ जानना बाकी है.
आज की सुनने की रस्म
“Panchi Nadiya Pawan Ke Jhonke” सुनने से पहले किसी पुराने या नए नक़्शे पर एक ऐसा शहर चुनिए जिसका नाम आपको याद रह गया हो. उसकी ओर जाने वाली रेखा को आँखों से देखिए और उस जगह के बारे में एक सवाल लिखिए. गीत के बाद उस सवाल को संभाल कर रखिए. किसी जगह को जानने की शुरुआत कभी एक छोटे सवाल से भी हो सकती है.