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घर की छोटी महफ़िल
जब कमरा डांस फ़्लोर बना.
कभी नाचने के लिए बस एक गीत और थोड़ी-सी जगह चाहिए होती थी.
थोड़ी जगह बनाइए
घर की महफ़िल हमेशा बड़ी तैयारी से नहीं बनती. कुर्सी थोड़ा सरकती है, आवाज़ थोड़ा बढ़ती है और जो कमरा रोज़ का लगता था, वही नए ढंग से दिखने लगता है. कोई क़दम याद रखे या न रखे, किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ता.
साथ हँसने का बहाना
ऐसे पलों में गीत जितना याद रहता है, उतनी ही हँसी भी. किसी को बीच में आना है, किसी को सिर्फ़ ताली बजानी है. महफ़िल में शामिल होने का एक ही सही तरीका नहीं होता. छोटी-सी जगह सबको अपने ढंग से साथ रख सकती है.
आज की छोटी कोशिश
“Tamma Tamma Loge” चलाइए और एक गीत भर के लिए कमरे में जगह बनाइए. नाचना मन न हो तो बैठकर उसकी ऊर्जा सुनिए. फिर चाय के साथ उस पल को बिना तस्वीर या प्रदर्शन के भी याद रहने दीजिए.