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एक गली, एक धुन
साइकिल की घंटी वाला रास्ता.
कुछ रास्ते नक़्शे से नहीं, उनकी रोज़ की आवाज़ों से याद रहते हैं.
पहचानी हुई आवाज़
साइकिल की घंटी छोटी-सी आवाज़ है. गली में आते ही वह रास्ता माँगती है और फिर आगे निकल जाती है. उसी बीच कोई दुकान खुलती है, कहीं बर्तन रखे जाते हैं, कहीं दरवाज़ा बंद होता है. रोज़ सुनाई देने वाली इन आवाज़ों पर ध्यान कम जाता है, फिर भी वे किसी जगह को हमारा परिचित रास्ता बना देती हैं.
मंज़िल से पहले का समय
पुराना रास्ता याद करते हुए अक्सर उसके हर मोड़ का नाम याद नहीं आता. याद आता है कि चलते हुए गति कब धीमी हुई थी और कब सामने की दुनिया कुछ देर के लिए खुल गई थी. इसी वजह से सफ़र केवल पहुँचने का काम नहीं रहता. रास्ते में बिताया समय भी उसकी याद का हिस्सा बनता है.
आज की सुनने की रस्म
“Aao Milo Chalen” सुनिए और अपने आसपास के किसी सुरक्षित, परिचित रास्ते के बारे में सोचिए. अगली बार वहाँ से गुज़रें तो एक मिनट के लिए फ़ोन जेब में रखिए और आसपास की आवाज़ें सुनिए. किसी विशेष व्यक्ति की याद गढ़ने की ज़रूरत नहीं; जगह की अपनी छोटी धुन भी काफ़ी है.